Ads by Smowtion

Sunday, February 14, 2010

राजा बनने की सोचे

जो व्यक्ति जिस तरह की सोच रखता हैं तथा लागातार एक ही तरह की सोच बनाये रखता हैं, वह उसी तरह का बन जाता हैं। हमने बचपन से ही अलग अलग व्यक्तियों के बारे में अलग अलग तरह की बातें सुनी व देंखी होती हैं पर बडे होकर हम उनका विशलेषण कर उपयोगी बातें अपनी जिन्दगी में ढ़ालनॅ का प्रयास नहीं करते जो कि हमें अवश्य करनी चाहिये।

हमने हमेशा सुना कि किसी गरीब व्यक्ति की लाटरी निकल गई या उसे जमीन बेचकर उसने डेर सारे पैसे मिला पर कुछ साल बाद हमॅ वह व्यक्ति वापस गरीबी में दिखाई देता है दिखाइे देता है वही दूसरी तरफ यह पाते है कि एक धनवान व्यक्ति व्यापार में घाटे के कारण गरीब हो गया और कुछ सालों बाद जब हम उससे मिलते है तो वह पुन: धनवान दिखाई देता है। ये बातॅ हो सकती है कुछ लोगो पर लागु न हो पर अधिकतर लोगो पर लाग़ू होती है। इसका सीधा संबंघ सोच से है। व्यक्ति केवल पैसे से अमीर गरीब नहीं होता सोच से भी अमीर गरीब होता है। पुराने जमाने में ( क्षत्रिय की मां ) अपने बेटे को वीरॉ की काहानियां सुनाया करती थी ताकि बेटे वीर की तरह सोचे और वीर बने।

हमें भी अपने अग्रणी व्यक्ति की तरह सोचनी चाहिये अर्थात इस Field के राजा की तरह लगातार सोचे तब हम मानसिक रुप से अपने कार्य क्षेत्र के अग्रणी बनने के लिये तैयार रहॅ।

एक राजा का जन्म दिन था सुबह जब वह घूमनॅ निकला तो उसने तय कर रखा था कि वह उससे मिलने वाले पहले व्यक्ति को पुरी तरह खुश व संतुष्ट करेगा उसे एक भिखारी मिला जो सुरत- शक्ल से बहुत गरीब दिखाई दे रहा था। भिखारी ने राजा से एक तांबे का सिक्का भीख में माँगा राजा ने भिखारी की तरफ एक तांबे का सिक्का उछाल दिया तांबे का सिक्का भिखारी के हाथ से छूटकर एक नाली में जा गिरा भिखारी नाली में हाथ डाल ताबें का सिक्का ढुढंने लगा। राजा ने उसे बुलाकर दुसरा तांबे का सिक्का दिया भिखारी खुश होकर वह सिक्का अपनी जेब में रख लिया और वापस जाकर नाली में गिरा सिक्का ढुढ़ने लगा। राजा को लगा की भिखारी बहुत गरीब है। तो उसने भिखारी को बुलाकर चांदी का एक सिक्का दिया भिखारी राजा की जय जयकार करता फिर नाली में सिक्का ढुढंने लगा। राजा को लगा कि भिखारी संतुष्ट नहीं है। सो उसने भिखारी को एक सोने का सिक्का दिया। भिखारी खुशी से झुम उठा और वापस भाग कर अपना हाथ नाली की तरफ बढाने लगा राजा को बहुत खराब लगा उसे खुद से तय की गई बात याद आ गयी की आज उसे उस व्यक्ति को खुश एवं संतुष्ट करना है। उसने भिखारी को बुलाया और कहा कि में तुम्हें अपना आधा राज पाट देता हूँ अब तो खुष व संतुष्ट हो। भिखारी ने कहा मै खुश और संतुष्ट तभी हो सकूंगा जब नाली का वह भाग जिसमें तांबे का सिक्का गिरा है। वह मेरे हिस्से में आये।

जो व्यक्ति अपनी सोच में परिवर्तन नहीं लाता है। वह व्यक्ति आगे नहीं बढ सकता। इसलिए अग्रणी व्यक्ति की तरह सोचें। यदि आपको राजा बनना है। तो लगातार सोचे केवल राजा कि तरह सोचें।

मधुर चितलांग्या

No comments:

Post a Comment